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लोक पहल द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020: परिवेश नया, आयाम नए” विषय पर 19 दिसंबर 2021 को ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी (अध्यक्ष – राज्य उच्च शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश) जी रहे।

वक्तागण एवं विचार माला


प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी (अध्यक्ष, राज्य उच्च शिक्षा परिषद् उत्तर प्रदेश)- किसी भी व्यवस्था में निष्पादन की क्षमता और निर्माण करने की जिम्मेदारी सरकार की होती है। मगर इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए सरकार को जनसहयोग की आवश्यकता होती है। यह बात शिक्षा पर भी लागू  होती है। अतः यह आवश्यक है की जनता सरकार की नीतियों को समझे, स्वीकारे और उसके साथ स्वयं को सम्बद्ध करे। 

मानव विकास की बात करें तो इसकी शुरुआत बाहुबल, मसल पावर से हुई। कालान्तर में धनबल ने विकास को संचालित किया। परन्तु अंततः ज्ञान और शिक्षा मानव विकास के स्थायी वाहक साबित हुए हैं। शिक्षा का समेकित और सर्वांगीण होना आवश्यक है। उतना ही आवश्यक है सांस्कृतिक मूल्यों में इसका स्थापित होना। यह देखा गया है कि उद्योग धंधों के लिए जिस प्रकार का योग्य मानव संसाधन चाहिए , वैसा उन्हें नहीं मिल पा रहा। दूसरी और पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगार हैं। आवश्यकता है उद्योग धंधों और शिक्षण संस्थानों के बीच संवाद स्थापित करने की।  जिससे शिक्षित नौजवानों में वह कौशल हो जिसे नियोक्ता चाहते हैं। इससे जहाँ एक और बेरोजगारी कम होगी वहीं देश के विकास कार्य गतिमान होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक आयाम यह भी है कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों में एक पेशेवर समन्वय और साझेदारी हो।  

नयी शिक्षा नीति का एक प्रमुख घातक है  समाज की सकारात्मक भागीदारी। इसलिए ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो का लक्ष्य  50% रखा  गया  है। अर्थात अधिक से अधिक लोग शिक्षा की  मुख्य धारा से जुड़ें। व्यक्ति, समाज और देश, सभी के सर्वांगीण एवं सार्थक विकास के लिए स्वतंत्रता, स्वायत्तता और सम्प्रभुता आवश्यक है। ऐसा विकास तभी संभव है जब शिक्षा और ज्ञान भी स्वतंत्र, स्वयात्त एवं सम्प्रभु हों तथा राष्ट्र के सांस्कृतिक मूल्यों के मूल में प्रतिष्ठित हों। इसी विचारधारा से प्रेरित हो कर  महामना मदन मोहन मालवीय ने विश्व की सांस्कृतिक नगरी काशी में काशी विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी इसी विचारधारा से प्रेरित है।  

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण आयाम यह है कि शिक्षा खंड खंड में न हो। समेकित हो। प्राथमिक, माध्यमिक , स्नातक , स्नातकोत्तर ; इन सब में एक आधारभूत निरंतरता हो।  ऐसी  ही निरंतरता  विविद्य पेशेवर एवं अकादमिक पाठ्यक्रमों में भी हो। यदि कोई विद्यार्थी किसी पेशेवर कोर्स को चुनता है और 2  वर्ष बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि वह पाठ्यक्रम उसकी प्रकृति और प्रवृत्ति से बेमेल है, तो वह अपना रास्ता बदल कर नए पेशे / पाठ्यक्रम का चुनाव कर सकता है। ऐसी स्तिथि में उसके 2 वर्ष का श्रम बेकार नहीं जायेगा, उन दो वर्षों का उसे औपचारिक प्रमाणपत्र दिया जायेगा। इस प्रकार नयी शिक्षा नीति विद्यार्थी को अपनी नैसर्गिक क्षमता एवं अभिरुचि के अनुरूप अपना कैरियर बनाने और आजीविका चुनने की व्यावहारिक स्वतंत्रता देती  है। इतना ही नहीं, शिक्षक वर्ग  को विद्यार्थियों की छुपी हुई प्रतिभा को पहचानने, उकेरने और प्रोत्साहित करने का दायित्व सौंपा गया है।

दो वर्ष के गहन अध्यन, विशेषज्ञों से मंत्रणा तथा 2 लाख से भी अधिक सुझावों के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को बनाया गया है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद इसका प्राण तत्व है। समाज के हर व्यक्ति में कोई न कोई विलक्षण प्रतिभा आवश्य होती है जिसके आधार पर वह समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना सकता है। यही अवधारणा शिक्षा नीति का केंद्र बिंदु है। प्रतिभा को पहचानने और परिष्कृत करने का वातावरण बनाया जाना चाहिए। राष्ट्र निर्माण रातों रात नहीं होता। योग्य, संस्कारवान और चरित्रवान व्यक्ति ही राष्ट्र निर्माण कर सकते हैं। और ऐसे नागरिक एक समेकित, समग्र और गतिशील शिक्षा प्रणाली से ही प्राप्त हो सकते हैं। इसलिए अध्यापन, अध्ययन और शोध; शिक्षा नीति के ये तीन आधार स्तम्भ हैं। और यह बात सर्वोपरि है कि शिक्षा पद्यति जीवन-मूल्यों से जुड़ सके और देश का हर नागरिक शिक्षा पद्यति से आत्मसात कर सके। 

निःसंदेह, शिक्षा का सर्वोपरि लक्ष्य राष्ट्र निर्माण है। क्योंकि राष्ट्र एक समुच्य है, व्यक्ति, परिवार और समाज का; इन तीनो घटकों की प्रगति भी शिक्षा में निहित है। परन्तु यह नितांत आवश्यक है कि ये तीन घटक राष्ट्र  निर्माण में किसी प्रकार की बाधा न बने। व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास हो सके इसलिए विद्यार्थी को ऐसे विषय भी चुनने की स्वतंत्रता दी गयी है जो उसके मुख्य धारा पाठ्यक्रम से इतर हैं। उदहारण के लिए विज्ञान का छात्र साहित्य, संगीत अथवा चित्रकारी भी सीख सकता है। 

राष्ट्रीय शिक्षा   नीति 2020 के कार्यान्वयन के लिए 10 वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया गया है। समाज के सभी वर्ग, विद्यार्थी, शिक्षक, आम और खास इस शिक्षा-नीति पर चर्चा करें, इसे समझें और दूसरों को समझाएं। यह आवश्यक है। क्योकि सरकार की योजना या नीतियां जनसमर्थन के बिना सफल नहीं हो सकतीं।      

कार्यक्रम का पूरा वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया गया है, देखने के लिए निचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

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( उ.  प्र.)  चुनावी  सर्वेक्षण  2022
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