एक लंबे अंतराल के बाद 2017 के विधान मंडल के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अप्रत्याशित जीत प्राप्त हुई थी। उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय राजनीति की प्रयोगशाला बन गई थी। परंतु राष्ट्रीय दल भारतीय जनता पार्टी ने 2017 का विधानसभा प्रचंड बहुमत से जीत लिया था। राजनीतिक समीक्षकों का ऐसा मानना था कि वस्तुतः उत्तर प्रदेश की विधानसभा का चुनाव अति पिछड़ी जातियों के एकत्रीकरण का परिणाम था। इसमें सत्यांश भी हो सकता है। परंतु राजनीतिक जातीय एकत्रीकरण मौलिक गत्यात्मक ऊर्जा राष्ट्रवाद की थी इसमें संशय नहीं है। उत्तर प्रदेश में 2017 के चुनाव के दौरान भाजपा का मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं था और उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी के विधान मंडल ने अपना नेता गोरक्ष पीठाधीश्वर माननीय योगी आदित्यनाथ जी को अपना नेता चुना। योगी आदित्यनाथ जी के पास कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था परंतु जिस प्रशासनिक दक्षता, क्षमता एवं कठोरता के साथ विधि एवं व्यवस्था को प्रतिस्थापित करने में वे सफल रहे वह अभूतपूर्व है। भारतीय संविधान, राजनीति और प्रशासन को गहरे रूप से समझने वाले समीक्षकों का अभिमत है कि दशकों के बाद उत्तर प्रदेश को एक कठोर प्रशासक और निष्पक्ष मुख्यमंत्री प्राप्त हुआ है। जहां एक ओर योगी आदित्यनाथ जी विधि एवं व्यवस्था जो राज्य का विषय होता है संवैधानिक रूप से प्रतिस्थापित करने में सफल रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के विकास की गति को भी निरंतरता में बनाए रखने में सफलता प्राप्त की है। यह विकास की गति महामारी के कालखंड में प्रतिस्थापित कर लेना एक चमत्कार ही है। वस्तुतः योगी आदित्यनाथ जी को एक प्रशासक के रूप में सफलता का श्रेय इसीलिए जाता है कि मुख्यमंत्री ने 30 करोड़ आबादी की देखभाल एक परिवार की भांति की है जिसमें किसी प्रकार का विभेद का तत्व दिखाई नहीं देता। ध्यान रहे कि योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक छवि कठोर हिंदू नेता की है परंतु प्रशासक के रूप में निरपेक्ष प्रशासनिक व्यवस्था की अधिस्थापना कर योगी आदित्यनाथ ने छवि के विपरीत जा कर स्वयं को एक सफल मुख्यमंत्री साबित किया।

वर्ष 2017 से 2021 के अंत तक उत्तर प्रदेश दंगों से मुक्त रहा है इस बात को विरोधी भी स्वीकार करते हैं और यह भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीति का यथार्थ है कि जिस भी मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रदेश में शांति की संभावनाएं निरंतर बलवती हों वह मुख्यमंत्री प्रदेश का निश्चित रूप से विकास कर सकता है। उत्तर प्रदेश संरचनात्मक विकास के अनेक आयाम को तय करने में सफल रहा है। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में सड़क महत्वपूर्ण विकास का तत्व और घटक है, उत्तर प्रदेश में सड़कों का जाल सा स्थापित हो गया है। उत्तर प्रदेश का पूर्वी क्षेत्र सड़कों के मामले में गरीब था परंतु आज स्थिति परिवर्तित हो गई है पूर्वांचल सड़कों से आच्छादित है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत सफलता है।

कोविड-19 की समस्या भयावह थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिन-रात व्यक्तिगत परिश्रम किया और उसका परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहा उत्तर प्रदेश की जनता विषम परिस्थितियों से निकलने में सफल रही। इस क्रम में यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस भयावह समय में मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में भ्रमण कर रहा था ।मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से 16-18 घंटे प्रत्येक दिवस कार्य कर रहे थे। विपक्ष आइसोलटेड था और मुख्यमंत्री सतत कर्मशील थे।

उत्तर प्रदेश में विपक्ष मुद्दा विहीन है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृद्धि अवश्य उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार के लिए चिंता का विषय हो सकती है इससे मध्यम वर्ग अत्यधिक प्रभावित है परंतु उत्तर प्रदेश की विशाल जनसंख्या जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करती है उसके सम्मुख यक्ष प्रश्न है भूख। उत्तर प्रदेश की सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। कोविड काल में रोजगार समाप्त हो चुके थे हैंड टू माउथ विशाल जनसंख्या के पास भूख विकट समस्या थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रत्येक घर में निःशुल्क, निःस्वार्थ एवं निरपेक्ष भाव से खाद्यान्न उपलब्ध कराया और यह वादा किया कि मुफ्त खाद्यान्न योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए आगामी 2022 के होली तक जारी रहेगी। उत्तर प्रदेश की गरीब और निर्धन पिछड़ी पद दलित जनता के लिए यह किसी महोत्सव से कम नहीं है। यह रेगिस्तान में उद्यान मिल जाने की अनुभूति जैसा है। यही प्रशासनिक क्षमता योगी आदित्यनाथ को दूसरे से भिन्न मुख्यमंत्री बना देती है क्योंकि यह संवेदना की पराकाष्ठा है। कहा गया है “ना मंदिर में ना मस्जिद में ना गिरजे के आसपास में, राम बसे हैं दीन हीन के भूख प्यास में” । रामभक्त मुख्यमंत्री ने अपनी वास्तविक रामभक्ति साबित कर दी है। उत्तर प्रदेश का विपक्ष उत्तर प्रदेश को जातियों के जनतंत्र की ओर अग्रसर करने की फिराक में है परंतु मुख्यमंत्री अपनी कर्तव्य परायणता के साथ उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा में लगे हैं। मुख्यमंत्री योगी जी धरातल पर सेवा कार्य में निरंतर तल्लीन हैं। यह किसी भी प्रशासक की सफलता का मूलमंत्र है। उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जिसके अध्यक्ष उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं जो भावी मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश की जनता के सम्मुख अपना प्रतिदावा प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका एकमात्र राजनीतिक अस्त्र है मुस्लिम तुष्टीकरण के माध्यम से उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मुसलमान वोटों का ध्रुवीकरण करना। इस क्रम में अखिलेश यादव जी भारत विभाजन के अपराधी जिन्ना को राष्ट्रवादी एवं धर्मनिरपेक्ष राजनेता स्थापित करने पर तुले हुए हैं। संभवत अखिलेश यादव को ओवैसी का डर सता रहा है कि कहीं ओवैसी मुस्लिम वोटों में सेंध न लगा दें। वस्तुतः समाजवादी पार्टी जो स्वयं को डॉ. लोहिया का वैचारिक वारिश मानती है, उनमें डॉ. लोहिया के समाजवाद से आत्मसाक्षात्कार करने की क्षमता नहीं है क्योंकि लोहिया की आत्मा राम, कृष्ण, और शिव में बसती है। अखिलेश यादव कह रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी को भारत का इतिहास पढ़ना चाहिए परंतु सर्वप्रथम अखिलेश यादव को डॉ. राम मनोहर लोहिया की रचना भारत विभाजन के अपराधी पढ़ना चाहिए। राम के अस्तित्व को नकारने वाली पार्टी कांग्रेस पार्टी पुनः राम विरोधी कृत्य में संलग्न है। उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण विपक्षी पार्टी और दलितों की व्यापक जनाधार वाली पार्टी बहुजन समाज पार्टी अपने अस्तित्व के संकट के दौर से गुजर रही है। कांग्रेस के पास नेता हैं परंतु कार्यकर्ता और जन समर्थन का अभाव है। छोटे-छोटे राजनीतिक दल जो जाति आधारित दल हैं वे दिग्भ्रमित हैं। राजभर जातीय समाज की पार्टी सुहेलदेव समाज पार्टी जिसका अस्तित्व पिछड़े आरक्षण के विभाजन पर टिका हुआ है जिसका मौलिक सिद्धांत है पिछड़े आरक्षण का विभाजन पिछड़े और अति पिछड़े में किया जाए। परंतु इस पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने लगभग अपनी राजनीतिक आत्महत्या करते हुए पिछड़ों के सबसे बड़े गुट जिसे 27% आरक्षण का सर्वाधिक लाभ मिल रहा है की पार्टी, समाजवादी पार्टी से समझौता कर लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का राजनीतिक मिजाज हिंदू और मुसलमान के मध्य विभाजित है और वोटिंग बिहेवियर इसी के अनुरूप होने की प्रबल संभावना है। बुंदेलखंड, अवध और मध्य उत्तर प्रदेश इसी वोटिंग पैटर्न का अनुसरण करेगा। उत्तर प्रदेश के जितने भर्ती केंद्र हैं जिसमें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग भी सम्मिलित है पारदर्शिता निष्पक्षता के साथ नौकरियों में भर्ती कर रहा है जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि उत्तर प्रदेश प्रशासन के हाथ में है। विगत एक दशक पूर्व राज्य प्रशासन के दबाव में नौकरियों में धांधली की खबरें आम थी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सीबीआई जांच इसका ज्वलंत उदाहरण है। अति पिछड़े और दलितों के घरों में नौकरियां पहुंच रही हैं। इसका व्यापक प्रभाव उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा में दिखाई देगा।

पहले उत्तर प्रदेश के थाने दलालों से संचालित होते थे। यहां माफिया राज था। उत्तर प्रदेश के माफिया जेल में बैठकर के भूमि हड़पने, रंगदारी वसूलने का कार्य करते थे। आज उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त है। उत्तर प्रदेश की सड़कें गड्ढों से मुक्त हैं। कृषि कानूनों का असर भविष्य में दिखाई देने लगेगा तब विपक्ष का सफाया हो जाएगा। उत्तर प्रदेश का चुनाव भारत की राजनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चुनाव होगा ऐसा इसलिए कि भारत विरोधी शक्ति उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार को ऐन-केन प्रकारेण समाप्त करना चाहती है परंतु व्यापक जनसमर्थन इस दुष्चक्र को भेदने में सफल होगा।

डा अखिलेश त्रिपाठी

प्रयागराज

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( उ.  प्र.)  चुनावी  सर्वेक्षण  2022
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